Wednesday, 22 April 2020

छत्तीसगढ़ धमतरी जिले का गंगरेल बांध या रविशंकर सागर बांध

गंगरेल बांध यह छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित है। इसे रविशंकर सागर बांध के नाम से भी जाना जाता है। गंगरेल बांध राजधानी रायपुर से यह 90 किमी की दूरी पर स्थित है। गंगरेल बांध का निर्माण सन 1978 में हुआ। इसका लोकार्पण तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हाथों किया गया था।
छत्तीसगढ़-का-गंगरेल-डैम
गंगरेल बांध छत्तीसगढ़
गंगरेल बांध परियोजना

धमतरी जिले में, यह स्थान पर्यटकों के लिए काफी प्रसिद्ध है। इस बांध का निर्माण महानदी पर किया गया है। बांध की दूरी 15 किमी है। 10 एमवी क्षमता की गंगरेल हाइडल पावर प्रोजेक्ट नामक एक हाइडल पावर परियोजना द्वारा आसपास के क्षेत्र हेतु विद्युत का उत्पादन होता है। गंगरेल बाँध में जल धारण क्षमता 15,000 क्यूसेक है। यह बांध सबसे बड़ा और सबसे लंबा बांध माना जाता है।

इसकी सुन्दरता के कारण ही दूर-दूर से लोग यहां घूमने आते हैं। यह बांध वर्षभर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराता है, जिससे इसके आस-पास के क्षेत्रों में धान की पैदावार बहुतायात में होती है और इसी वजह से छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है।

गंगरेल बांध का हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर प्लांट


यहां के मैदानी क्षेत्र के किसान प्रति वर्ष दो से तीन फसलों का उत्पादन कर सकते हैं। करीब 1830 मीटर लंबा और सौ फिट ऊंची इस बांध के पानी से लगभग 57000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। इसके अलावा ये भिलाई स्टील प्लांट और नई राजधानी रायपुर को भी पानी प्रदान उपलब्ध कराता है। बांध में 10 मेगावॉट की हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर प्लांट भी काम कर रहा है।

गंगरेल बांध का यह तट

बांध का यह तट किसी समुद्री तट की तरह नजर आता है और यहां उसी स्तर की सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां एथनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन डेवलपमेंट के अंतर्गत लॉग हट्स, कैफेटेरिया, गार्डन, पगोड़ा, वॉटर स्पोर्ट्स की सुविधा विकसित की गई है। पैरासीलिंग, प्लायबोर्ड, ऑकटेन, जार्बिन बॉल, पी.डब्ल्यू.सी.बाईक, बनाना राईड, सौ सीटर शिप, वॉटर सायकल, कयाक, पायडल बोट्स आदि का लुत्फ सैलानी यहां ले सकते हैं।

गंगरेल बांध ट्रायबल टूरिस्म सर्किट स्थल

भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना के तहत 'ट्रायबल टूरिस्म सर्किट" में छत्तीसगढ़ के जशपुर,कुनकुरी,मैनपाट,कमलेश्वरपुर,महेशपुर,कुरदर,सरोधादादर,गंगरेल,कोण्डागांव,नथियानवागांव,जगदपु,चित्रकोट,तीरथगढ़ सहित 13 प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ा जाएगा। परियोजना के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा 99 करोड़ स्र्पये स्वीकृत किए गए हैं।

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