Saturday, 1 February 2020

छत्तीसगढ़ का नामकरण व छत्तीसगढ़ की प्राचीन भाषा जानिए

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छत्तीसगढ़ का नामकरण व इसकी प्राचीन भाषा

छत्तीसगढ़ अंचल प्राचीन काल में दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था एवं यहाँ के निवासी कोसली भाषा का प्रयोग किया करते थे। अतः दक्षिण कोसल इस क्षेत्र का सर्वप्राचीन नाम एवं कोसली सर्वप्राचीन भाषा मानी जाती है। 
छत्तीसगढ़  क्षेत्र के लिए प्राचीन काल में विभिन नाम व भाषा व्यवहार में प्रचलित थे। जिसके नामकरण में विभिन साहित्यकार एवं इतिहासकारो ने अपने अपने मत प्रस्तुत किये। 

प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ का नाम इस प्रकार थे -

1. रामायण काल - दक्षिण कोसल 
2. महाभारत काल -कोसल या प्रककोसल
3. व्हेनसांग (चीनी यात्री ) - किया सा लो 
4. मुग़ल काल - रतनपुर राज्य
5. कनिघम - महाकोसल

नामकरण में विभिन साहित्यकार एवं इतिहासकारो के मत 

1. दलपतराम  राव - खैरागढ़ रियासत के राजा लछमिनिधि कर्णराय के चारण कवि दलपतराव ने 15 वी शताब्दी में साहित्य में छत्तिसगढ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया। 

लक्ष्मीनिधि राय सुनो चित्त दे ,गढ़ छत्तीस में न गढ़ैया रहि।
भरदुमी रही नहि भरदन के ,फेर हिमत से न लड़ैया रहि।   
 
2 . कवि गोपाल मिश्र - रतनपुर के कलचुरी शासक राजसिह (1689 -1712 ) के दरबारी कवि गोपाल मिश्र ने 17वी शताब्दी में अपनी रचना खूब तमसा में छत्तीसगढ़ शब्द का एवं छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रयोग किया था।
 
3. दंतेवाड़ा शिलालेख -दंतेश्वरी मंदिर , दंतेवाड़ा से 1730 ई में प्राप्त शिलालेख में छत्तीसगढ़ी शब्द व् अवधी भाषा का प्रयोग मिलता है। जिसे छत्तीसगढ़ी भाषा का प्राचीनतम शिलालेख माना जाता है। 31 मार्च 1702 में इस शिलालेख को बस्तर के राजा राजगुरु एवं मैथली पंडित भगवान मिश्र ने लिखा था।

4. मि. जे.टी. ब्लंट - इन्होने ही शासकीय दस्तस्वेज में सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ शब्द का प्रयोग किया। इन्होने 1795 के अपने यात्रा वृतांत का वर्णन बिलासपुर गजेटियर में किया। 

5. काशी नाथ गुप्ते - मराठा कालीन साहित्यकार काशीनाथ गुप्ते ने 1707 ई में '' नागपुर कर भोसल्याची बखर '' में छत्तीसगढ़ शब्द का प्रयोग किया है।

6. बाबू रेवाराम - रतनपुर के हाहैइवंशी शासको का इतिहास लिखने वाले आधुनिक साहित्यकार बबुरेवा राम ने सन् 1896 ई में अपनी कृति '' विक्रम विलास '' में छत्तीसगढ़ शब्द का प्रयोग किया।

अन्य ऐतिहासिक मत 

1 . वेगलर के अनुसार - प्राचीन काल में बिहार के शासक जरासंघ के समय में छत्तीसगढ़ क्षेत्र में 36 चर्मकार परिवार छत्तीस घर बनाकर बस गये और कालांतर में छत्तीसगढ़ हो गया। 

2. नेल्सन एवं हीरालाल के अनुसार - छत्तीसगढ़ क्षेत्र के कलचुरी शासक चेदि वंशीय भी कहलाते थे। अतः इस क्षेत्रका नाम चेदिसगढ़ पड़ा। जिसका अपभृंश कालांतर में छत्तीसगढ़ हो गया।

3. खलारी अभिलेख - छत्तीसगढ़ में रायपुर शाखा के कलचुरी शासक ब्रह्मदेव राय के खलारी अभिलेख के अनुसार शिवनाथ नदी के उत्तर व दक्षिण में कुल 36 गढ़ थे इस प्रसाशनिक व्यवस्था के आधार पर इस क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा। जो की सर्वाधिक मान्य मत है। इन गढ़ की सूचि का वर्णन मि. चिजम व हैविट के रिपोर्ट में मिलता है।

 छत्तीसगढ़  शब्द का प्रयोग -

1. साहित्य में सर्वप्रथम प्रयोग - दलपतराव  
2. राजनैतिक सन्दर्भ में सर्वप्रथम - कवि गोपाल 
3. विशुद्ध रूप से सर्वप्रथम प्रयोग -  कवि गोपाल 
4. शासकीय दस्तावेजों में सर्वप्रथम - मि. जे.टी. ब्लंट
5. महाकोसल के रूप में प्रयोग - कनिघम
6. सर्वाधिक मान्य मत - खलारी अभिलेख 
7. प्रथम छत्तीसगढ़ी भाषा शिलालेख - दंतेवाड़ा शिलालेख 


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